
ये बात आज से चार साल पुरानी है, जब मैं उन्नीस साल का था, कॉलेज में फर्स्ट ईयर में पढ़ रहा था, और मेरी छोटी बहन रिया, जो पंधरा की थी, आठवी क्लास में थी। हमारा घर दिल्ली के एक पॉश इलाके में था, दो मंजिला, ऊपर मेरे और रिया के अलग-अलग कमरे, नीचे मम्मी-पापा का बेडरूम। पापा का ट्रांसपोर्ट बिजनेस था, जिसके चलते वो रात को देर से, दस-ग्यारह बजे घर लौटते, थके-हारे सो जाते। मम्मी, जो चालीस के आसपास थीं, घर संभालती थीं, सुबह किचन में, दोपहर को सफाई में, और शाम को टीवी पर सीरियल देखते हुए टाइम पास करती थीं। वो सख्त नहीं थीं, लेकिन अपने रूटीन में व्यस्त रहती थीं। रिया पढ़ाकू टाइप थी, स्कूल से लौटते ही किताबें खोल लेती, रात तक पढ़ाई में डूबी रहती। वो देखने में कमाल की थी, फिगर ३४-२६-३४, हल्का सांवला रंग, लंबे काले बाल, और ऐसी हंसी जो किसी का भी दिल पिघला दे। मैंने उसे कभी गलत नजर से नहीं देखा था, वो मेरी बहन थी, बस। मैं खुद पढ़ाई के साथ-साथ दोस्तों के साथ घूमता, कंप्यूटर पर गेम खेलता, या टाइम पास करता।






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